
जगमग करती दिवाली फिर प्यार लुटाने आई है
हर जीवन में शुभ प्रकाश हो , ये संदेसा लायी है
जगमग - जगमग दीप जले हैं, सुन्दर - सुन्दर प्यारे - प्यारे
नन्हें हांथों में फुलझड़िया, देखो कितने लगते न्यारे
ख़ुशी लुटाती हर जीवन में , खुशियों का भण्डार दिवाली आई है
जगमग करती दिवाली फिर प्यार लुटाने आई है
दीप पर्व के इस अवसर पर मन के दीप जला लेना
प्रेम न्याय साहस औ सद्गुण, शुभाचरण अपना लेना
मानव हित का यह संदेसा , फिर से लेकर आई है
जगमग करती दिवाली फिर प्यार लुटाने आई है
उंच नीच का भेद मिटा कर दीप जलें सद्भाव लिए
दूर दूर तक जलते दीपक हम सबसे बस यहीं कहें
जियो दीप - सम तभी समझाना तुमने दिवाली मनाई है
जगमग करती दिवाली फिर प्यार लुटाने आई है