शनिवार, 29 अक्टूबर 2016

नरकचतुर्दशी : मुहूर्त , पूजा और महत्व



इस बार नरक चतुर्दशी 29 ऑक्टूबर 2016 को मनाई जा रही है | कहा जाता है इस दिन भूमि देवी ने अपने बेटे नरकासुर का वध किया था और इसीलिए आज के दिन व्रत रखते हैं और शाम को कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा करते है | ये भी माना जाता है की माँ काली ने नरकासुर का वध किया था | नरकचतुर्दशी को बहुत ही उत्साह से मनाया  जाता है | नरक चतुर्दशी का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है और ये माना जाता है की आज के दिन पूजा पाठ करने से नरक जाने से बच सकता है |

लोग आज के दिन देवी देवताओं को खुश करने की कोशिश करते है ताकि उनकी असीम अनुकम्पा बनी रहे | लोग तेल और उपटन लगाते है और काजल लगाते है ताकि बुरी नजर से बचा जा सके |

नरकचतुर्दशी मानाने का मुहूर्त

अभ्यंग स्नान मुहूर्त  = 05:20 to 06:41

समय = 1 घंटा 20 मिनट
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ -- 18 :20 --- 28/Oct/2016
चतुर्दशी तिथि समाप्त -- 20:40 --- 29/Oct/2016

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

धनतेरस – लक्ष्मी – दीपावली





धनतेरस लक्ष्मी दीपावली
पांच दिनों का दीपो का उत्सव प्रकाश पर्व शुक्रवार धनतेरस से शुरू होगा । भगवान् धन्वन्तरि बिघ्नों को दूर कर आरोग्य प्रदान करते  है । वैसे तो धनतेरस पर सोना- चांदी या बर्तन खरीदने की परंपरा सदियों से रही है लेकिन इस बार अमृत योग और स्थिर लग्न में खरीदारी का कई गुना फल मिलेगा  पर अगर आप आज के दिन बर्तन खरीदते हैं तो उसमे मिष्ठान से भर दे , शास्त्रो में मान्यता है की ऐसा करने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है ।  वैसे तो  सभी 12 राशियों के जातकों के लिए कुछ भी खरीदना शुभ होगा पर राशि के अनुसार लग्न विशेष में लक्ष्मी पूजा करने से जातक के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी रहता है।

सभी राशियों के लिए लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त  6:50से 7:03 बजे तक।

दीपोत्सव  की तिथियां
28 अक्तूबर : धनतेरस
29 अक्तूबर : नरक चतुर्दशी, हनुमत जयंती
30 अक्तूबर : दीपावली
31 अक्तूबर : गोवर्धन पूजा, अन्नकूट
1  नवम्बर :  भइया दूज

 दीपावली की शुभकामनाएं




बुधवार, 21 सितंबर 2016

मिटटी भी जहा की पारस उस शहर का नाम बनारस है



बनारस कोई शहर नहीं है न ये पहले कभी था न अब है न आगे होगा .... बनारस तो यहां के लोगो से है , यहाँ की मस्ती से है , यहां की सोच से है | बनारस दुनिया का सबसे पुराना और जीवित शहर है ,कहते हैं कि चौसठ योगिनियों, बारह सूर्य, छप्पन विनायक, आठ भैरव, नौ दुर्गा, बयालीस शिवलिंग, नौ गौरी, महारूद्र, चौदह ज्योर्तिलिंग, काशी में ही हैं। अतः महाज्ञानी जब तक काशी में अपने ज्ञान की परीक्षा नहीं देता, तब तक उसका ज्ञान अधूरा रहता है।

चना चबैना, गंगाजल जो पुरवै कर तार
काशी कबहूं न छोडि़ये विश्वनाथ दरबार।

बनारस के बारे में कहा जाता है कि जो यहां कुछ दिन रह गया उसका मन फिर दुनिया में कहीं नहीं लगता. मशहूर शहनाई वादक स्वर्गीय बिसमिल्ला खान से लेकर आईआईटी बनारस में प्रोफेसर रह चुके जानेमाने प्रर्यावरणविद डा वीरभद्र मिश्र को विदेशों में बेहतर सुख-सुविधाओं के साथ बसने के तमाम मौके मिले, लेकिन उन्होंने यह कर कभी बनारस नहीं छोड़ा कि उन्हें वहां “गंगा” कहां मिलेगी.

 बनारस में आज भी लोग दफ्तर और दूकान जाने के अलावा भी घर से बाहर निकलते हैं , चाय-पान की दूकान पर बतियाते मिल जाएंगे | यहां लोग अपना जीवन आराम और उल्लास से मानते हैं | काशीनाथ सिंह ने लिखा है जो मजा बनारस में वो न पेरिस में न फारस में। ...|जिस तरह से बनारस का पान, भांग, मिठाई, साड़ी, आम जगत विख्यात है, उसी तरह यहां की गप्पबाजी भी सारे जहां में प्रसिद्ध है। बनारस के गप्प में जो मजा है, वह सारे जहां के सच में नहीं है।

बनारस अपनी गंगा जमुनी तहजीब के लिए भी जाना जाता है यहाँ एक मस्जिद है लाटभैरो की मस्जिद जहा मस्जिद के बीच में एक मंदिर है मस्जिद में नमाज़ और मंदिर में पूजा एकसाथ होती है | . गांगा का आनन्द यहां के हिंदू ही नहीं मुसलमान भी उठाते हैं. गंगा के घाटों पर विचरण करते तमाम मुसलमान मिल जाएंगे. मशहूर शायर नजीर बनारसी को गंगा के घाट बहुत प्रिय थे. वे कहा करते थे कि ईश्वर उन्हें कभी बनारस से दूर न करे. तो बिसमिल्ला खान भगवान शिव के अराधक थे और विश्वनाथ मंदिर भगवान शंकर के दर्शन करने जाया करते थे. यह दुर्लभ उदाहरण केवल बनारस में ही मिल सकता है.

बनारस के बारे में अपनी पंक्ति में नीलभ उत्कर्ष लिखते है

‘’रईसों मलंगों की बस्ती बनारस
कई घाट गंगा गुज़रती बनारस ,
नहीं आपाधापी नहीं भागादौड़ी
यहाँ अल सुबह रोज़ छनती कचौड़ी
अजब सी है मस्ती यहाँ की ठहर में
ग़ज़ल अपनी काशी मुकम्मल बहर में

हर हर महादेव ...............

रविवार, 14 अगस्त 2016

हिन्दू धर्म के त्यौहार आने पर हिन्दुओ की मूर्खता

हिन्दू धर्म के त्यौहार आने पर हिन्दुओ की मूर्खता-

आजकल एक बड़ा खतरनाक प्रचलन चला है हिन्दुओं में, वह यह कि जैसे ही कोई त्यौहार आने वाला होता है, खुद हिन्दू ही उस त्यौहार को ऐसे पेश करते हैं जैसे वो उनके ऊपर बोझ है :

1) रक्षाबंधन पर मूर्खता :
कुछ हिन्दू ऐसे मैसेज भेजते हैं कि ||कोई भी अनजान चीज को हाथ नहीं लगाये, उसमें राखी हो सकती है !! ||

अरे कूल dude !!
तुम्हारे लिए अपनी बहन बोझ बन रही है?? तुम तो राखी का मज़ाक़ बना बैठे हो, तुम क्या अपनी माँ बहन की रक्षा करोगे? राखी एक रक्षा सूत्र है, अगर तुम भूल रहे हो तो याद दिलाऊँ राजस्थान में औरतें अपनी रक्षा के लिए जोहर कर आग में कूद जाती थी।

रानी पद्मिनी के साथ 36000 औरतें जोहर हो गयी थीं। एक महिला की रक्षा मज़ाक लगती है???

2) दशहरा पर मूर्खता :
यह मैसेज आजकल खूब प्रचलन में है कि || रावण सीता जी को उठा ले गया है और राम जी लंका पर चढ़ाई करने जा रहे हैं, उसके लिये बंदरो की आवश्यकता है, जो भी मैसेज पढ़े तुरंत निकल जाये ||

वाह!!! आज सीता अपहरण हिन्दुओं के लिए मज़ाक़ का विषय हो गया है। जोरू का गुलाम बनना गर्व का विषय और राम का सैनिक बनना मज़ाक़ हो रहा है!!!

दूसरा जोक || रावण को कोर्ट ले जाया गया व कहा गया कि गीता पर हाथ रख कसम खाओ तब रावण कहता है सीता पर हाथ रखा उसमें इतना बवाल हो गया, गीता पर रखा तो……||

यह बड़े शर्म की बात है कि अग्नि परीक्षा देने के बाद भी आज हिन्दू सीता माता के चरित्र पर सवाल उठाने को मज़ाक़ समझते हैं। कभी अपनी माता के बारें में ऐसे मज़ाक़ उड़ाया? अगर नहीं तो तुम्हें किसने हक दिया समस्त हिंदुत्व की माता पर हाथ रखने को मज़ाक़ बनाने का ????

एक हमारा मीडिया पहले ही हिन्दू त्यौहारों के पीछे पड़ा है-
होली पर पानी बर्बाद होता है लेकिन ईद पर जानवरों की क़ुरबानी धर्म है!

दिवाली पर पटाके छोड़ना प्रदूषण है पर ईसाई नव वर्ष पर आतिशबाजी जश्न है!

नवरात्री पर 10 बजे के बाद गरबा ध्वनि प्रदूषण हो जाती है, वहीं मोहरम की रात ढोल ताशे कूटना और नववर्ष की रात जानवरों की तरह 12 बजे तक बाजे बजाना धर्म है!!!

करवा चौथ और नाग पंचमी पाखंड है वहीं ईसा का मरकर पुनः लौटना गुड फ्राइडे वैज्ञानिक है!!

हिन्दुओं को यह लगता है कि अपने पर्व का मज़ाक़ बनाना सही है तो इससे बड़ी लानत क्या होगी??

हम राखी और सीता अपहरण पर मज़ाक़ करते हैं, इसके पीछे समाज की मानसिकता बनती है। लोग लड़की की रक्षा से कतराते हैं , क्योंकि राखी को हमने मज़ाक़ बना दिया है, हमने सीता माता जैसी पवित्र माँ का मज़ाक़ बना दिया है। इससे पता चलता है हम कितने धार्मिक हैं!

हिन्दू धर्म की विडंबना देखिए :-
जन्माष्टमी आयी तो श्री कृष्ण को टपोरी तडीपार और ना जाने क्या-क्या कहा!

गणेश जी आये तो उनका भी मज़ाक़ बनाया!

नवरात्रि आयी तो ये चुटकुला आया “नौ दिन दुर्गा-दुर्गा फिर मुर्गा-मुर्गा…”

विजयादशमी पर श्री राम-माता सीता और रावण पर चुटकुले चले!

कभी सोचा है ओरिजनली कौन ये सब पोस्ट कर रहा है??? ये कभी किसी ने भी जानने की कोशिश नहीं की.. बस अपने मोबाइल पर आया तो बिना सोचे समझे फॉरवर्ड करने की वही भेड़ चाल चालू..!!

इस तरह के मैसेज बनाने वाले जानते हैं कि हम हिन्दू अपने धर्म को लेके सजग नहीं हैं और एडवांस्ड दिखने के चक्कर में कुछ भी फॉरवर्ड कर देंगे.. तभी ये ऐसे मैसेज बनाकर सर्कुलेट करते हैं!!

किसी और धर्म के लोगों को उनके धर्म के जोक्स पढ़ते या फॉरवर्ड करते देखा है?? उनको तो छोड़ो, आप भी उनके धर्म के जोक्स फॉरवर्ड करने से पहले 10 बार सोचते हो कि किसको भेजूँ- किसको नहीं??

तो हिन्दू धर्म का मज़ाक़ उड़ाते शर्म नहीं आती..??

मेरा करबद्ध निवेदन है कि
अपने हाथों से अपने धर्म का अपमान ना करें.. कुछ सीखे अन्य धर्म के लोगो से उनकी तरह ही अपने धर्म का सम्मान करे
जय श्रीकृष्ण !!!
जय श्रीराम

शनिवार, 13 अगस्त 2016

कश्मीर , आर्मी और उपकार

जंगल में शेर शेरनी शिकार के लिये दूर तक गये अपने बच्चों को अकेला छोडकर।
देर तक नही लौटे तो बच्चे भूख से छटपटाने लगे उसी समय एक बकरी आई उसे दया आई और उन बच्चों को दूध पिलाया फिर बच्चे मस्ती करने लगे तभी शेर शेरनी आये बकरी को देख लाल पीले होकर हमला करता उससे पहले बच्चों ने कहा इसने हमें दूध पिलाकर बड़ा उपकार किया है नही तो हम मर जाते।
अब शेर खुश हुआ और कृतज्ञता के भाव से बोला हम तुम्हारा उपकार कभी नही भूलेंगे जाओ आजादी के साथ जंगल मे घूमो फिरो मौज करो।
अब बकरी जंगल में निर्भयता के साथ रहने लगी यहाँ तक कि शेर के पीठ पर बैठकर भी कभी कभी पेडो के पत्ते खाती थी।
यह दृश्य चील ने देखा तो हैरानी से बकरी को पूछा तब उसे पता चला कि उपकार का कितना महत्व है।
चील ने यह सोचकर कि एक प्रयोग मैं भी करता हूँ चूहों के छोटे छोटे बच्चे दलदल मे फंसे थे निकलने का प्रयास करते पर कोशिश बेकार ।
चील ने उनको पकड पकड कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया बच्चे भीगे थे सर्दी से कांप रहे थे तब चील ने अपने पंखों में छुपाया, बच्चों को बेहद राहत मिली
काफी समय बाद चील उडकर जाने लगी तो हैरान हो उठी चूहों के बच्चों ने उसके पंख कुतर डाले थे।
चील ने यह घटना बकरी को सुनाई तुमने भी उपकार किया और मैंने भी फिर यह फल अलग क्यों? ?
बकरी हंसी फिर गंभीरता से कहा
उपकार भी शेर जैसो पर किया जाए चूहों पर नही।
चूहों (कायर) हमेशा उपकार को स्मरण नही रखेंगे वो तो भूलना बहादुरी समझते है और शेर(बहादुर )उपकार कभी नही भूलेंगे ।
सनद रहे की पिछले वर्ष कश्मीरियों को सेना ने बाढ़ में डूबने से बचाया था और आज वो ही एहसान फरामोश सेना पे पत्थर और ग्रेनेड फेंक रहे हे ।
बहुत ही विचारणीय है👆🙏

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