वो अक्सर धुएं में खो जाता है जैसे धुएं में उसे सुकून मिलाता हो जैसे सिगरेट ही उसके सुख दुःख का साथी हो। ......और करता भी क्या जब इंजीनियरिंग कर रहा था तो उसे लगा था नौकरी जल्दी मिल जाएगी इसलिए मन लगा के पढ़ाई करी , अपने कॉलेज में टॉप किया पर कुछ नहीं हुआ । जिस वर्ष कैंपस होने वाला था उस वर्ष रिसेशन आ गया कोई कंपनी नहीं आई , जिनके पास जुगाड़ था उन्ही का प्लेसमेंट हुआ मतलब उन्ही को नौकरी मिली । आज पुरे एक साल हो गए थे नौकरी ढूंढते - ढूंढते , पर अब तक निराशा ही हाँथ लगी थी । बड़ी देर से इंतज़ार कर रहा था आज अपने साथ ही पढ़ने वाले एक मित्र का जिसने बोला था आज मिलने को और नौकरी के सिलसिले में कुछ बात करने को । वो इंतज़ार कर रहा था , कभी सड़क के इस तरफ तो कभी सड़क के उस तरफ , नज़रे उठा कर दूर तक देखने की कोशिश करता फिर इधर उधर घूमने लगता । किसी का इंतज़ार , आपको बेचैन कर देती है , इसी बेचैनी को सिगरेट कम करती है , वह इधर उधर देखता है फिर बेचैनी , जेब टटोलता है एक ही सिगरेट बची थी पीते हुए सोचने लगता है काफी देर हो गयी घर की तरफ चल पड़ता है , पर घर पहुंचने से पहले घर पर पीने के लिए एक दो सिगरेट और ले लेना चाहता है पास की एक दूकान की तरफ बढ़ लेता है रस्ते में एक मर्गिल्ली सी भिखारिन रिरियाने लगी , ये बाबू कुछ खाये के दे दो , बहुत भूख लगा बा , दे दो बाबू जी नाही ता हम भूखे मर जाईब । वो रुक कर अपना जेब देखता है, सिर्फ एक सिगरेट के पैसे थे उसमे , उसने सोचा अगर इसे दे दिया तो सिगरेट नहीं ले पाउँगा और फिर ये तो भिखारन है इसे कोई न कोई तो दे ही देगा । वह मुंह दूसरी तरफ करके चल देता है , भिखारिन अभी भी रिरिया रही थी । उसने अगली दूकान से सिगरेट ली और घर की बढ़ गया , नींद नहीं आ रही थी सिगरेट पीता है और सोचने लगता है कहाँ चूक हो गयी उससे जो अभी तक बेरोजगार है , सोचते सोचते उसे कब नींद आ गयी पता ही नहीं चला । सुबह उठा सिगरेट नहीं थी तो उठ कर दूकान की तरफ बढ़ लिया देखा गली में काफी भीड़ लगी हुई थी उसने दुकानदार से सिगरेट मांगी और पूछा क्या हुआ , दुकानदार ने बताया एक भिखारिन मर गयी है। बीते शाम की सारी घटनाएं उसके दिमाग में कौंध जाती है फिर वही बेचैनी , वो सिगरेट का पैकेट लेता है और घर को चल देता है । घर पहुँच कर लगातार इधर उधर टहलते हुए एक के बाद एक सिगरेट पीता है । पछतावा होता है उसे और झुंझलाता है अपने पर , एक सिगरेट की कीमत किसी की जिंदगी से ज्यादा हो गयी आज । फिर एक सिगरेट जलाता है और बैठ जाता है .. और आज फिर उसके अंदर एक इंसान की मौत हो जाती है........
सोमवार, 30 मई 2016
रविवार, 29 मई 2016
वामपंथी भूत और इस भूत का इलाज
बहुत पुरानी बात है गांव में दो लोग रहते थे एक रामखेलावन और एक नरोत्तमदास । दोनों लोगो के साथ एक ही तरह की घटना हुई पर दोनों लोगो के घर पर उसका रियेक्सन अलग अलग मिला । हुआ यूँ की एक दिन रामखेलावन रात को कहीं से गांव आ रहे थे । रास्ते में एक आम का बगीचा पड़ता था उसे सब लोग भुतहा बगीचा कहते थे पर गांव जाने के लिए उसी बगीचे से जाना था नहीं तो घूम के जाने में एक दो घंटा ज्यादा लग जाता, देर वैसे भी हो गयी थी तो रामखेलावन , हनुमान चालीसा पढ़ते हुए उसी बगीचे से जाने लगे तभी उनको लगा कोई उनका पीछा कर रहा है वो पीछे मुड़ के देखे तो कोई नहीं दिखा वो फिर हनुमान चालीसा पढ़ते आगे बढ़ने लगे फिर खरखराहट की आवाज आने लगी रामखेलावन फिर रुक गए तो खरखराहट की आवाज भी आनी बंद हो गयी अब रामखेलावन की हालत खराब । उनका गला सूखने लगा और दिल की धड़कन तेज हो गयी वो और तेज तेज हनुमान चालीसा पढ़ने लगे और जितना तेज दौड़ सकते थे दौड़ लगा दी और घर पहुंचे और खरखराहट की आवाज उनके घर तक पीछा की जब वे धड़ाम से घर के बहार रखी खाट पर गिरे तब जा के खरखराहट की आवाज भी बंद हुयी । डर के मारे हाँथ पांव काँप रहे थे सांसे तेज चल रही थी पसीने पसीने हो गए थे रामखेलावन ,तभी उनके पिताजी बहार निकले और रामखेलावन को खाट पर पड़े देख बोले , अरे रामखेलौना तू कब आया और का हुआ काहे इतना हांफ रहा है रामखेलावन लगे चिल्लाने अरे बाबू अब जान ना बचिहै, भूतहवा बगइचा से आवत रहे, घरवा तक भूत दौड़ाए रहा अब ता जान ले के ही मानी , उनके बाबू जी भी डर गए । सुबह हुई गांव के लोग आये सारी बात बताई गयी तभी किसी ने देखा उनके गमछे में आम की एक लकड़ी फँसी है और उसमे कुछ पत्ते भी लगे है तब जा के पता चला की रामखेलावन जब दौड़ रहे थे तब खरखराहट की आवाज कहाँ से आ रही थी पर तब तक देर हो चुकी थी रामखेलावन के दिमाग में डर घर कर गया था अब वो किसी तर्क से संतुष्ट होने वाले नहीं थे । डर के वजह से बुखार आ गया , दवा भी दी गयी गयी पर बुखार फिर चढ़ जाता ।ऐसे ही 10 -15 दिन बीत गए पर बुखार ठीक नहीं हो रहा था तब गांव में किसी बुजुर्ग ने कहा की दवा से अब रमखेलौना ठीक न होइहै इसके डर का इलाज करो कउनो ओझा सोझा बुलाओ , पास वाले गांव में एक ओझा रहता था बुलाया गया उसने अपनी नौटंकी सुरु की रामखेलावन को नीम का धुंआ , मिर्चे का धुंआ और बीच बीच में डंडे से पिटाई लगाते हुए बोलता, चला जा नहीं तो बोतल में बंद कर गंगा में बहा दूंगा और करीब एक घंटे तक रामखेलावन की दुर्दशा करने के बाद बोतल में धुंए को भर के बोला लो भाई भूत को हमने बोतल में बंद कर दिया है इसे गंगा जी में बहा दो दुबारा नहीं आएगा । अब रामखेलावन के डर का इलाज हो गया था और उन्हें ये विश्वाश हो गया था की अब भूत वपास नहीं आने वाला तो धीरे धीरे उनकी तबियत ठीक हो गयी । ऐसा ही खिस्सा नरोत्तमदास के साथ भी हुआ , वो भी डरे हुए थे और चिल्ला रहे थे पर जैसे ही नरोत्तमदास के पिताजी ने सुना दिए कान के नीचे दो बोले भूत उतरा या अभी भी पकड़ा हुआ है । नरोत्तमदास उस समय चुप हो गए पर कुछ देर बाद फिर बोले की लगता है भूतवा हमारे दिमाग पर चढ़ गया है तो उनके पिताजी फिर दिए दो कंटाप कान के नीचे , अब जब भी नरोत्तमदास भूत का जीकर करते उनकी पिटाई हो जाती । नरोत्तमदास इस घटना को भूलने में ही अपनी भलाई समझी।
ये वामपंथी विचारधारा भी इसी भूत की तरह होती है लोगो को पता होता है की उनके गमछे में लकड़ी फँसी है पर फिर भी वो नहीं मानते भूत - भूत चिल्लाते रहते है और जिस किसी को पकड़े उसका और साथ वालों का जीना हराम कर देती है इसलिए इसका इलाज ज़रूरी है और इलाज जितना जल्दी हो जाए अच्छा है । अब जब भी आपको कोई वामपंथी विचारधारा के भूत से ग्रसित व्यक्ति दिखे तो देखे की उसके ऊपर उसका आसर कितना है और फिर उनका उचित इलाज करिये , विधि तो आप समझ ही गए होंगे .......
शुक्रवार, 27 मई 2016
मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के दो साल
मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के दो साल हो गए । सरकार भी दो सा पुरे होने पर अपनी उपलब्धियां गिना रही है तो विपक्ष नाकामियों को बता रही है । लोकल सर्किल डॉट कॉम ने एक सर्वे करवाया है , अगर इस सर्वे को मान जाये तो इसके अनुसार 46 % लोगो ने माना की सरकार अपने दो साल के काम काज में खरी उतरी है, 18 % लोगो ने इसे उम्मीद से ज्यादा बताया जबकि 36 % लोगो ने इसे उम्मीद से काम बताया है ।
सरकार के दो साल पुरे होने पर इंस्टावानी ने भी सर्वे कराया जिसमे करीब 10000 लोगो ने भाग लिया के अनुसार 68% लोगों ने माना कि 2 साल पहले के मुकाबले आज अभिव्यक्ति की आजादी ज्यादा है, वहीं भ्रष्टाचार के सवाल पर 62 % ने माना कि बीते 2 साल में भ्रष्टाचार कम हुआ है, सर्वे में 82 फीसदी ने माना कि बीते 2 साल में दुनिया में देश की छवि बेहतर हुई है।
अगर इन सर्वे और हाल ही में हुए चुनावो के आधार पर बात कही जाए तो निश्चित रूप से नतीजे सरकार के पक्ष में ही जायेंगे और मोदी जी का दो साल का कार्य-काल संतोषजनक ही कहलायेगा । स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं से एक नयी आशा जगी है और इस तरह की योजनाओं में रोजगार की सम्भावनाएं भी दिखती है जिससे और युवाओं में एक जोश आया है। जनधन योजना , मुद्रा बैंक , प्रधानमंत्री फसल विमा योजना, राष्ट्रीय कृषि बाजार और स्वच्छता अभियान आदि एक अच्छी शुरुआत है ।
विदेश निति के तहत पकिस्तान जैसे हमारे पडोसी देश से हमारे सम्बन्ध भले ही अच्छे न हो पाये हो पर पकिस्तान को रक्षात्मक की मुद्रा अख्तियार करने पर विवश तो कर ही दिया है । अमेरीका, जर्मनी, फ्रांस, जापान तथा आस्ट्रेलिया जैसे देशो से नजदीकियां बढ़ा कर विश्व में भारत की छवि में सुधार किया है ।
वामपंथियों द्वारा की जा रही सभी नौटंकियों जैसे , असहिष्णुता , सेलेक्टिव मुद्दे पर अवार्ड वापसी , गोमांस का मुद्दा, गोहत्या पर बैन , अखलाख की हत्या , जे एन यू प्रकरण , रोहित वेमुल्ला की लाश पर राजनीती जैसे मुद्दों पर सही निर्णय लेते हुए सबका साथ सबका विकास पर ध्यान देते हुए दो साल पुरे किये ।
रेलवे में पहले से काफी सुधार हुआ और पटरियों को बिछाने की गति पहले से काफी तेज हुई है। सड़कों की भी स्थिति पहले से काफी बेहतर हुयी है । बीएसएनएल और एयर इंडिया पिछले दस सालो में पहली बार फायदे में है, और सबसे बड़ी बात अभी दो साल में मोदी सरकार भ्रस्टाचार मुक्त सरकार है ।
असम में जीत और दो साल पुरे होने पर बी जे पी और मोदी जी को बधाई।
सोमवार, 23 मई 2016
भारत के खाते में एक और सफलता
भारत के खाते में एक और सफलता, पहला मेड इन इंडिया स्पेस शटल लॉन्च ......
भारत ने आज सोमवार को अपना पहला स्पेस शटल लॉन्च कर दिया. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) की ये लॉन्चिंग ऐतिहासिक है क्योंकि यह फिर से इस्तेमाल किया जा सकनेवाला शटल पूरी तरह भारत में बना है. इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से सुबह 7 बजे लॉन्च किया गया. अभी ऐसे रियूजेबल स्पेस शटल बनाने वालों के क्लब में अमेरिका, रूस, फ्रांस और जापान ही हैं.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रवक्ता ने आरएलवी-टीडी एचईएक्स-1 के सुबह सात बजे उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद कहा, ‘अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया।’ यह पहली बार है, जब इसरो ने पंखों से युक्त किसी यान का प्रक्षेपण किया है। यह यान बंगाल की खाड़ी में तट से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी पर उतरा। हाइपरसोनिक उड़ान प्रयोग कहलाने वाले इस प्रयोग में उड़ान से लेकर वापस पानी में उतरने तक में लगभग 10 मिनट का समय लगा। आरएलवी-टीडी पुन: प्रयोग किए जा सकने वाले प्रक्षेपण यान का छोटा प्रारूप है।
बुद्धा इन ट्रैफिक जैम (Buddha in a Traffic Jam)
बुद्धा इन ट्रैफिक जैम एक शानदार फिल्म है । विवेक अग्निहोत्री जिन्होंने अपने पहली फिल्म चॉकलेट डायरेक्ट की थी और जो ज्यादातर कमर्सिअल सिनेमा ही बनते है इस बार एक ऐसी फिल्म के साथ आये है जो आदर्शवाद , समाजवाद, नक्सलवाद , भ्रष्टाचार और अन्य मुद्दों पर आपको सोचने पर मजबूर करती है । इस सिनेमा में यह दिखाया गया है की पिछले 60 सालो से आदिवासियों के हालात में कोई बदलाव कैसे नहीं हुआ । कैसे ये लाल सलाम वाले हर जगह फैले हुए है। इस फ़िल्म में अलग अलग " वाद " पर भी चर्चा की गयी है जिसके बारे में हम सोचते है की यह हमारे देश के लिए सही है । पिछले कुछ महीनो से चल रही बहस जैसे की "राष्ट्रवाद" या "कट्टरपंथ" जैसे मुद्दों पर भी बहस की गयी है । हालाँकि यह फ़िल्म बहुत अच्छी बनी है और आपको बहुत सारे मुद्दों पर सोचने पर मजबूर करती है पर शायद यह सबको पसंद ना आये क्योंकि इसमें कोई आइटम सांग नहीं है , कोई धांसू एक्शन या चटपटे डायलॉग नहीं है , फिर भी मेरे हिसाब से यह फ़िल्म एक बार ज़रूर देखनी चाहिए । मुझे बहुत पसंद आई , शायद आपको भी अच्छी लगे...
रविवार, 22 मई 2016
आपका आदर्श कौन ? टीना डाबी या कुलदीप द्विवेदी.......
टीना डाबी ने टाप किया है जबकी कुलदीप द्विवेदी कि रैंक 242 है , तो क्या यह सही है कि पहली रैंक कि तुलना 242वें रैंक से कि जाये पर आर्थिक स्थिति देखने पर यह तुलना जरूरी हो जाती है ।
टीना के पिताजी जनरल मैनेजर है बी एस एन एल मे और उनकी मॉ भी आई ई एस है जबकि कुलदीप के पिताजी लखनउ विश्वविद्धालय मे गार्ड कि नौकरी करते है । टीना के पिताजी ने रिजर्वेशन का फायदा उठाते हुये दिल्ली इन्जिनियरिन्ग कॉलेज से बी.टेक किया , फिर रिजर्वेशन का फायदा उठाते हुये टेलिकॉम डिपार्टमेन्ट मे नौकरी ली और फिर शायद रिजर्वेशन का फायदा उठाते हुये प्रमोशन भी लिया । इनका मॉ ने भी रिजर्वेशन का फायदा उठाते हुये सरकारी नौकरी ली ।हमारे संविधान के हिसाब से उन्होने कुछ भी गलत नही किया ।
टीना के माता -पिता दोनो बहुत पढ़ने लिख हैे और अच्छा कमाते है ।
अब आते हैं कुलदीप द्विवेदी पर , इनके पिताजी एक गार्ड कि नौकरी करते है। कुल 8000 कमाते है इसलिये गरीबी रेखा से नीचे भी नही है । सवर्ण है इसलिये अन्य लाभ भी इनके लिये नहीं है । कुलदीप द्विवेदी के मार्क्स ,टीना डाबी से कही ज्यादा है प्री इक्जाम मे , मेन्स का मुझे पता नही , पर जैसा कि बताया जा रहा टीना डाबी ने बहुत अच्छा किया था मेन्स मे पर अगर वह रिजर्वेशन का फायदा नहीं उठाती तो शायद अंकित कि तरह मेन्स लिख भी नही पाती । वो आई ए एस जरूर बनती पर शायद इस बार नहीं।
मुझे टीना डाबी के लिये खुशी है पर साथ मे अंकित जैसे लोगो के लिये दुख भी है ।
जात आधारित रिजर्वेशन का मै इसी लिये बिरोध करता हूं । कुछ लोग तर्क देते है कि हमारे पुर्वजो ने इनपर बहुत जुल्म किया था , हालांकि मै यह मानने को तैयार नही हुं क्योकी जितना मैने पढ़ा है उससे तो यही लगता है कि पहले जो योग्य होता था वही शासन करता था पर अगर एक बार इनकि बात मान भी लि जाये तो ये कहॉ का न्याय है कि दीदा परदादाओ के अपराधो कि सजा बेटो को दी जाये , ऐसा तो हमारा संविधान भी नही कहता ।
बदले कि भावना मन से निकाल दिजीये ,अपने आपको दलित , नीच कहना बन्द किजीये क्योकि प्रकृति का सिद्धान्त है दो जैसा सोचता है वैसा हो जाता है और ऐसा सोचते हुये टाप करके भी किसी के लिये आदर्श नही बन पायेंगे जबकि लोग आपसे बहुत पीछे होने के बावजूद लोगो के आदर्श बनेगे। मेरे लिये तो कुलदीप द्विवेदी हम सबका आदर्श होना चाहीये , आप के लिये आप चुनिये ।।।।।।।।।।
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