रविवार, 11 दिसंबर 2016

5G upcoming technology

आपलोग 2G , 3G , 4के बारे में जरूर सुना होगा और आप में बहुत सारे लोग इनमे से किसी ना किसी टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल कर रहे होंगे और ज्यादातर लोग जो 4G का भी इस्तेमाल कर रहे होंगे कहीं ना कहीं अपने इन्टरनेट की स्पीड को और बेहतर चाहते होंगे | सबसे पहले 2G आया 1991 में उसके बाद 3G आया 1998 में फिर 4G आया 2008 में और अब  आने वाले दिनों में 2020 तक  आप 5G का इस्तेमाल कर पाएंगे जिसकी स्पीड 4G से कही अच्छी होगी |

5बिलकुल अलग तरह से काम करेगा जैसे की अभी वर्तमान में हम 700MHz , 1900 MHz फ्रीक्वेंसी का प्रयोग करते है मतलब फ्रीक्वेंसी बैंड की सीमा 1GHz से 2GHz की है जबकि 5G 28 GHz से शुरू होगा जोकी 60 GHz तक जा सकता है |

फ्रीक्वेंसी बढ़ने से हम काफी तेजी से डाटा एक जगह से दूसरी जगह भेज पाएंगे और इन्टरनेट की स्पीड काफी बढ़ जाएगी पर इसका नुकसान ये होगा की सिग्नल लॉस ज्यादा होगा क्योंकि फ्रीक्वेंसी बढ़ने से रेंज कम हो जाती है | इस समस्या से निजात पाने के लिए मिलीमीटर वेव टेक्नोलॉजी का प्रयोग करते है जिससे हमें अपने स्मार्टफोन में मल्टीप्ल एंटेना लगाने की सहूलियत मिल जाएगी जिससे सिग्नल स्ट्रेंथ बढ़ाया जा सकेगा और यही काम हम मोबाइल टावर के साथ भी कर सकते है |

अभी 5G के लिए कोई मानक तय नहीं किया गया है जैसा की 4G के लिए LTE डिफाइंड किया गया है या 3के लिए HSPA या उमटस है तो अभी हमें इसके लिए इंतज़ार करना पड़ेगा |


अगर 5G के स्पीड की बात करे तो QUALCOMM के अनुसार इसकी स्पीड 5GPs हो सकती है और QUALCOMM इसे 2018 के ओलंपिक में टेस्ट भी करने वाला है

शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

मैं एक हिन्दू हूँ और परेशान हूँ .......


मैं एक हिन्दू हूँ और परेशान हूँ धर्म निरपेक्ष रहना चाहता हूँ पर ......... और मेरी ये परेशानी लगातार बढती जा रही है मुझे समझ नहीं आ रहा की मैं क्या करू | हिन्दू हूँ तो जहां मैं ३३ करोड़ देवी देवताओं का आदर सम्मान कर सकता हूँ तो अवश्य ही कुछ और अलाह ईसामसीह और अन्य देवी देवताओं का आदर कर सकता हूँ और ये सब करते हुए भी मैं हिन्दू रह सकता हूँ लेकिन मुझे तब दुख होता है जब मेरे मुस्लिम भाई क्रिश्चियन भाई प्रसाद खाने से मना कर देते है तिलक लगाने से मना कर देते हैं | क्या धर्म निरपेक्ष होना सिर्फ हिन्दुओं का उत्तरदायित्व है | अगर भारत धर्म निरपेक्ष है तो क्यों हमारे आपके टैक्स के पैसो से हज सब्सिडी दी जाती है . क्या यह एक विशेष धर्म का पक्ष लेना नहीं है ... लेकिन फिर वही बात की मैं हिन्दू हूँ और मुझे लगता है की ठीक है कोई बात नहीं अगर इससे वो खुश है तो ठीक है क्योंकि ईद मुबारक कहना मुझे भी अच्छा लगता है | इस समय हम ऐसे देश में रह रहे है जहाँ अगर कोई मुसलमान या क्रिश्चियन कहे की भारत को मुस्लिम या क्रिश्चियन राष्ट्र बना दे तो कोई खबर नहीं बनती और ये सूडो इंटेलेक्टुअल के पेट में दर्द नहीं होता लेकिन जैसे ही किसी ने कहा की ये हिन्दू राष्ट्र है तो ये सूडो इंटेलेक्टुअल अपना झाल मंजीरा लेकर आ जाते है राग अलापने .. भाई मेरे अगर विरोध करना है तो दोनों का करो , क्योंकि दोनों गलत है सेलेक्टिव क्रिटसिज़्म बंद करो ... मैं हिंदू हूँ और कहा जाता है माइनॉरिटी को आप लोग दबाते है ६० साल में हम एक मंदिर नहीं बना सके जब की देश में ८० प्रतिशत हिन्दू हैं और आप कहते हैं हम आपकी नहीं सुनते अगर ऐसा होता तो मंदिर कब का बन गया होता .पर ऐसा नहीं है बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है , मैं बीफ नहीं खाता शाकाहारी हूँ पर अगर आप खाना चाहे तो खा सकते हैं ये आपका बेहद निजी मसला है लेकिन जब ये आप सिर्फ हमें चिढ़ाने के लिए करते हैं तब दुःख होता है और गुस्सा भी आता है . आप को जो खाना हो खाएं पर चिढ़ाएं नहीं ... 
अगर ये तथाकथित बुद्धजीवी अपना पुरस्कार वापस करना चाहते है तो करें मैं आपके साथ रहूँगा.... जब आप कहेंगे , हज सब्सिडी हटा ली जाये , सबके लिए एक ही कानून हो, धर्म विशेष के लिए अलग अलग व्यवस्थाएं न हों , आप अगर दादरी का विरोध कर रहे है पुजारी की भी हत्या का विरोध करिये .... आरक्षण आर्थिक आधार पर हो , किसी भी तरह के हिंसा को धर्म से या जाती से न जोड़ा जाये , हिन्दू आतंकवाद ,मुस्लिम आतंकवाद जैसे शब्दों का प्रयोग बंद हो , आतंकवादी को सिर्फ आतंकवादी कहा जाये ......
इतनी उम्मीद तो मैं आप लोगो से कर ही सकता हूँ .......

ढोल, गंवार, शुद्र, पशु , नारी । सकल ताड़ना के अधिकारी


दरअसल.... कुछ लोग इस चौपाई का अपनी बुद्धि और अतिज्ञान के अनुसार ..... विपरीत अर्थ निकालकर तुलसी दास जी और रामचरित मानस पर आक्षेप लगाते हुए अक्सर दिख जाते है....!
यह बेहद ही सामान्य समझ की बात है कि..... अगर तुलसी दास जी स्त्रियो से द्वेष या घृणा करते तो.......
रामचरित मानस में उन्होने स्त्री को देवी समान क्यो बताया...?????
और तो और.... तुलसीदास जी ने तो ...
“एक नारिब्रतरत सब झारी। ते मन बच क्रम पतिहितकारी।“
अर्थात, पुरुष के विशेषाधिकारों को न मानकर......... दोनों को समान रूप से एक ही व्रत पालने का आदेश दिया है।
साथ ही .....सीता जी की परम आदर्शवादी महिला एवं उनकी नैतिकता का चित्रण....उर्मिला के विरह और त्याग का चित्रण....... यहाँ तक कि.... लंका से मंदोदरी और त्रिजटा का चित्रण भी सकारात्मक ही है ....!
ऐसे में तुलसीदास जी के शब्द का अर्थ......... स्त्री को पीटना अथवा प्रताड़ित करना है........आसानी से हजम नहीं होता.....!
साथ ही ... इस बात का भी ध्यान रखना आवश्यक है कि.... तुलसी दास जी...... शूद्रो के विषय मे तो कदापि ऐसा लिख ही नहीं सकते क्योंकि.... उनके प्रिय राम द्वारा शबरी.....विषाद....केवट आदि से मिलन के जो उदाहरण है...... वो तो और कुछ ही दर्शाते है ......!
फिर, यह प्रश्न बहुत स्वाभिविक सा है कि.... आखिर इसका भावार्थ है क्या....?????
इसे ठीक से समझाने के लिए...... मैं आप लोगों को एक """ शब्दों के हेर-फेर से..... वाक्य के भावार्थ बदल जाने का एक उदाहरण देना चाहूँगा .....
मान ले कि ......
एक वाक्य है...... """ बच्चों को कमरे में बंद रखा गया है ""
दूसरा वाक्य .... "" बच्चों को कमरे में बन्दर खा गया है ""
हालाँकि.... दोनों वाक्यों में ... अक्षर हुबहू वही हैं..... लेकिन.... दोनों वाक्यों के भावार्थ पूरी तरह बदल चुके हैं...!
असल में ये चौपाइयां उस समय कही गई है जब ... समुन्द्र द्वारा श्री राम की विनय स्वीकार न करने पर जब श्री राम क्रोधित हो गए........ और अपने तरकश से बाण निकाला ...!
तब समुद्र देव .... श्री राम के चरणो मे आए.... और, श्री राम से क्षमा मांगते हुये अनुनय करते हुए कहने लगे कि....
- हे प्रभु - आपने अच्छा किया जो मुझे शिक्षा दी..... और ये लोग विशेष ध्यान रखने यानि .....शिक्षा देने के योग्य होते है .... !
दरअसल..... ताड़ना एक अवधी शब्द है....... जिसका अर्थ .... पहचानना .. परखना या रेकी करना होता है.....!
तुलसीदास जी... के कहने का मंतव्य यह है कि..... अगर हम ढोल के व्यवहार (सुर) को नहीं पहचानते ....तो, उसे बजाते समय उसकी आवाज कर्कश होगी .....अतः उससे स्वभाव को जानना आवश्यक है ।
इसी तरह गंवार का अर्थ .....किसी का मजाक उड़ाना नहीं .....बल्कि, उनसे है जो अज्ञानी हैं... और प्रकृति या व्यवहार को जाने बिना उसके साथ जीवन सही से नहीं बिताया जा सकता .....।
इसी तरह पशु और नारी के परिप्रेक्ष में भी वही अर्थ है कि..... जब तक हम नारी के स्वभाव को नहीं पहचानते ..... उसके साथ जीवन का निर्वाह अच्छी तरह और सुखपूर्वक नहीं हो सकता...।
इसका सीधा सा भावार्थ यह है कि..... ढोल, गंवार, शूद्र, पशु .... और नारी.... के व्यवहार को ठीक से समझना चाहिए .... और उनके किसी भी बात का बुरा नहीं मानना चाहिए....!
और तुलसीदास जी के इस चौपाई को लोग अपने जीवन में भी उतारते हैं....... परन्तु.... रामचरित मानस को नहीं समझ पाते हैं....
जैसे कि... यह सर्व विदित कि .....जब गाय, भैंस, बकरी आदि पशुओं का दूध दूहा जाता है.. तो, दूध दूहते समय यदि उसे किसी प्रकार का कष्ट हो रहा है ....अथवा वह शारीरिक रूप से दूध देने की स्थिति में नहीं है ...तो वह लात भी मार देते है.... जिसका कभी लोग बुरा नहीं मानते हैं....!
सुन्दर कांड की पूरी चौपाई कुछ इस तरह की है.....
प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं।
मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥
ढोल, गंवार, शुद्र, पशु , नारी ।
सकल ताड़ना के अधिकारी॥
भावार्थ:-प्रभु ने अच्छा किया जो मुझे शिक्षा दी.. और, सही रास्ता दिखाया ..... किंतु मर्यादा (जीवों का स्वभाव) भी आपकी ही बनाई हुई है...!
क्योंकि.... ढोल, गँवार, शूद्र, पशु और स्त्री........ ये सब शिक्षा तथा सही ज्ञान के अधिकारी हैं ॥3॥
अर्थात.... ढोल (एक साज), गंवार(मूर्ख), शूद्र (कर्मचारी), पशु (चाहे जंगली हो या पालतू) और नारी (स्त्री/पत्नी), इन सब को साधना अथवा सिखाना पड़ता है.. और निर्देशित करना पड़ता है.... तथा विशेष ध्यान रखना पड़ता है ॥

सोमवार, 31 अक्टूबर 2016

भाई दूज पूजा शुभ मुहूर्त

जैसा की भाई - बहन के परस्पर प्रेम का प्रतीक यह त्यौहार दीपावली के एक या दो दिन बाद मनाया जाता है ,इस साल भाई दूज का त्यौहार 1 नवम्बर को मनाया जायेगा | कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को भाई बहनों को समर्पित पर्व  को यमद्वितीया भी कहते हैं | इसदिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र व उज्ज्वल भविष्य के लिए कामना करती हैं | ऐसा मन जाता है की यम-द्वितीया के दिन यमराज स्वयं धरती पर अपनी बहन यमुना से मिलाने आते हैं | चित्रगुप्त की भी पूजा इसी दिन होती है | इस दिन बहन के हाँथ से बने चावल खाने से भाई की उम्र लंबी होती है ऐसी मान्यता है | 
Happy Bhai Dooj

जैसा की इस बार भैया दूज 1 नवम्बर को मनाया जा रहा है पर ३ बजे से लेकर साढ़े चार बजे तक राहु काल है तो इस समय को छोड़कर कभी भी बहाने अपने भाई को तिलक कर सकती है  |

 यमराज अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे, लेकिन ज्यादा काम होने के कारण अपनी बहन से मिलने नहीं जा पाते। एक दिन यम अपनी बहन की नाराजगी को दूर करने के लिए उनसे मिलने पहुंचे। भाई को आया देख यमुना बहुत खुश हुईं। भाई के लिए खाना बनाया और आदर सत्कार किया। बहन का प्यार देखकर यम इतने खुश हुए कि उन्होंने यमुना को खूब सारे भेंट दिए। यम जब बहन से मिलने के बाद विदा लेने लगे तो बहन यमुना से कोई भी अपनी इच्छा का वरदान मांगने के लिए कहा। यमुना ने उनके इस आग्रह को सुन कहा कि अगर आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन हर साल आप मेरे यहां आएं और मेरा आतिथ्य स्वीकार करेंगे। कहा जाता है इसी के बाद हर साल भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है।
इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा को लेकर भी भाई दूज की एक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि नराकासुर को मारने के बाद जब भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने पहुंचे थे। उनकी बहन ने उनका फूलों और आरती से स्वागत किया था और उनके माथे पर टीका किया था। जिसके बाद से इस त्योहार को मनाया जाने लगा और इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं।

शनिवार, 29 अक्टूबर 2016

नरकचतुर्दशी : मुहूर्त , पूजा और महत्व



इस बार नरक चतुर्दशी 29 ऑक्टूबर 2016 को मनाई जा रही है | कहा जाता है इस दिन भूमि देवी ने अपने बेटे नरकासुर का वध किया था और इसीलिए आज के दिन व्रत रखते हैं और शाम को कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा करते है | ये भी माना जाता है की माँ काली ने नरकासुर का वध किया था | नरकचतुर्दशी को बहुत ही उत्साह से मनाया  जाता है | नरक चतुर्दशी का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है और ये माना जाता है की आज के दिन पूजा पाठ करने से नरक जाने से बच सकता है |

लोग आज के दिन देवी देवताओं को खुश करने की कोशिश करते है ताकि उनकी असीम अनुकम्पा बनी रहे | लोग तेल और उपटन लगाते है और काजल लगाते है ताकि बुरी नजर से बचा जा सके |

नरकचतुर्दशी मानाने का मुहूर्त

अभ्यंग स्नान मुहूर्त  = 05:20 to 06:41

समय = 1 घंटा 20 मिनट
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ -- 18 :20 --- 28/Oct/2016
चतुर्दशी तिथि समाप्त -- 20:40 --- 29/Oct/2016

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

धनतेरस – लक्ष्मी – दीपावली





धनतेरस लक्ष्मी दीपावली
पांच दिनों का दीपो का उत्सव प्रकाश पर्व शुक्रवार धनतेरस से शुरू होगा । भगवान् धन्वन्तरि बिघ्नों को दूर कर आरोग्य प्रदान करते  है । वैसे तो धनतेरस पर सोना- चांदी या बर्तन खरीदने की परंपरा सदियों से रही है लेकिन इस बार अमृत योग और स्थिर लग्न में खरीदारी का कई गुना फल मिलेगा  पर अगर आप आज के दिन बर्तन खरीदते हैं तो उसमे मिष्ठान से भर दे , शास्त्रो में मान्यता है की ऐसा करने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है ।  वैसे तो  सभी 12 राशियों के जातकों के लिए कुछ भी खरीदना शुभ होगा पर राशि के अनुसार लग्न विशेष में लक्ष्मी पूजा करने से जातक के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी रहता है।

सभी राशियों के लिए लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त  6:50से 7:03 बजे तक।

दीपोत्सव  की तिथियां
28 अक्तूबर : धनतेरस
29 अक्तूबर : नरक चतुर्दशी, हनुमत जयंती
30 अक्तूबर : दीपावली
31 अक्तूबर : गोवर्धन पूजा, अन्नकूट
1  नवम्बर :  भइया दूज

 दीपावली की शुभकामनाएं




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