रविवार, 7 नवंबर 2010

बचपन की दीपावली, कुछ यादें


कहते है त्यौहार बच्चो के होते हैं , उनके लिए त्योहारों का अर्थ होता है नए कपडे, मिठाईयां इत्यादि | बच्चे त्योहारों का इंतज़ार करते है और बड़े सिर्फ छोटो की ख़ुशी के लिए शामिल होते है और अपना बचपन उनमें पाकर उन्हें खुश देखकर खुश होते है | मैंने कहीं ये शेर पढ़ा था याद नहीं किसने लिखा है ,

बच्चों के छोटे हांथों को चाँद सितारे छूने दो,
चार किताबें पढ़कर ये भी हम जैसे हो जायेंगे

बचपन बीते एक अरसा बीत गया है पर बचपन की यादें अभी भी ताज़ा है जैसे कल की ही बात हो | बीती रात दीपावली बचपन की कई यादो को ताज़ा कर चली गयी | बचपन में दीपावली की आहट से ही मन परफुल्लित हो उठाता था , उस वक़्त कोई रोक - टोक नहीं कोई टेंशन नहीं बस दीपावली के जश्न मनाने का जोश रहता था और शायद यही वजह होती थी की हम बच्चो की दीपावली कम से कम एक हफ्ते पहले से शुरू हो जाती थी | सब लोग मिलकर पटाखे जलाते थे, दीप जलाते थे और कितने प्रेम सौहार्द और जोश के साथ दीपावली का आनंद लेते थे | बहुत मजा आता था | दिवाली के त्योहार के लिये हमारे पूरे घर में सफाई-पुताई का अभियान चलता था। दिवाली पर पूरा घर रोशनियों से जगमगा उठता था। मुझे यह सब कुछ बहुत अच्छा लगता था, इसीलिये मुझे दिवाली का त्योहार बचपन से ही बहुत पसंद है। हम आपने घरो , मंदिरों आदि स्थानों पर दीप जलाते थे ,पटाखे फोड़ते थे ,वैसे मेरे लिए दीपावली का एक अर्थ यह भी था की खूब सारे पटाखे फोड़ना और जमकर शैतानी करना, पर हमें दीपावली के सुबह का इंतज़ार रहता था की कब सुबह हो और हम ढेर सारे दिए लूट ले | हम उन दीयों से तराजू बनाते थे और पुरे दिन कुछ ना कुछ खेलते रहते थे | कभी कभी हम भाई - बहन दीयों को लेकर आपस में लड़ पड़ते थे | क्या दिन थे वो भी , काश वो दिन फिर से लौट आते ...................................
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8 टिप्‍पणियां:

  1. वैसे मुझे बताशे बेहद पसंद हैं चोरी से खा लेता था पूजा से पहले एकाध बार पिटा तो बंद कर दिया सच बचपन कितना बेगाना होता है न
    बराक़ साहब के नाम एक खत
    महाजन की भारत-यात्रा

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  2. अच्छा संस्मरण। बचपन के दिन तो नहीं लौटते,हां,तस्वीरों के ज़रिए उन दिनों की याद ज़रूर और ताज़ा की जी सकती है। बच्चों को दीपावली में फुलझड़ी छोड़ते देखना सुखदायी होता है। उन पलों को तस्वीरों में सहेजना चाहिए। कालांतर में उन्हें देखना रोमांचित करता है।

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  3. बहुत सुंदर संस्मरण.....बड़ी खूबसूरती से अपने भावों को शब्द दिए हैं......बचपन के वो दिन कहाँ कोई भूल सकता है..... दिवाली की मंगलकामनाएं

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  4. यादें ... याद आती हैं .. बातें रह जाती हैं याद आने के लिए .... आपको और पूरे परिवार को दीपावली की मंगल कामनाएं ..

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  5. अब तो बस यही उपाय रह गया है कि हर पल को भरपूर जिया जाए ताकि इस समय के बीतने का मलाल अगले कुछ वर्ष बाद न रहे।

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