बुधवार, 21 दिसंबर 2016

पेटीएम को लगी पेपाल की नज़र , किया कॉपीराइट उलंघन का केस

लगता है पेटीएम के अच्छे दिनों को नज़र लग गयी है.ये नज़र भी अजीब होती है तभी लगाती है जब कुछ अच्छा हो रहा हो तभी लगती है. अब जब पेटीएम नोटबंदी को भुना रहा था. अपने प्रचार जोरो शोरो से कर रहा था. जगह जगह बैनर पोस्टर लगा रहा था, गांव गांव में कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के मुहीम पर लगा था की पेपाल ने पेटीएम पर कॉपीराइट उलंघन का केस कर दिया. कैलिफोर्निया की पेमेंट गेटवे कंपनी पेपाल ने भारत में ट्रेडमार्क ऑफिस में केस किया है और ये दावा किया है की पेटीएम ने जानबूझकर वही रंग इस्तेमाल किया है जो पेपाल अपने लोगो में करता है.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार पेपाल ने कहा है की पेटीम ने पहला शब्द गहरे नीले रंग और दूसरा रंग हलके नीले रंग का इस्तेमाल किया है. पहला शब्द भी दोनों में एक ही है जिससे लोगो के बीच गलतफहमी की स्तिथि पैदा हो रही है. क्योंकि पेपाल 1999 से ही अपने लोगो में इन रंगों का इस्तेमाल कर रहा है और साथ ही पहला शब्द पे भी इस्तेमाल कर रहा है इसलिए कॉपीराइट उलंघन का केस बनाता है. अगर ये आरोप सही पाए जाते है तो पेटीएम अपने ट्रेडमार्क का इस्तेमाल नहीं कर पायेगा. जो कंपनी के इमेज के लिए बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है. साथ ही आरोप सही पाए जाने पर एक बड़ी राशि भी जुर्माने के रूप में देनी पड़ेगी.


वैसे पेटीएम भी अपना ट्रेडमार्क पिछले 6 सालो से इस्तेमाल कर रहा है तो पेपाल को अब क्यों अपना लोगो याद आ रहा है. क्या यह पेपाल का पेटीएम की उपलब्धियों को भुनाने की कोशिश तो नहीं .? पेपाल का यही समय चुनना उसे भी सवालो के घेरे में तो खड़ा करता ही है. 

कहते है मुसीबत आती है तो चारो ओर से ही आती है. पेटीएम पर अभी चीन को फायदा पहुचाने का रूप तो लग ही रहा था की फाइनेंसियल एक्सप्रेस के अनुसार पेटीएम को इस शुक्रवार को 48 यूज़र्स ने करीब 6 .15   लाख का चुना लगा दिया है. पी टी आई के रिपोर्ट के अनुसार अब इस केस को सी बी आई देख रही है.कंपनी का कहना है की ग्राहकों को भेजे गए उत्पादों में कोई कमी की स्तिथि में या क्षतिग्रस्त उत्पादों को एक रिवर्स प्रक्रिया के तहत ब्यापारियों को वापस भेज दिया जाता है तथा क्षतिग्रस्त उत्पादों के लिए भुगpतान भी किया जाता है. यह सारी प्रक्रिया एक टीम के द्वारा किया जाता है जिन्हें विशेष आईडी और पासवर्ड दिया जाता है. आरोप लगाया गया है की 48 ग्राहकों के मामले में इन्हें रिफंड मिला जबकि इनके प्रोडक्ट की डिलेवरी सफल और संतोषजनक रही थी. इससे एक बड़े धोकाधड़ी का मामला बनता है.  प्रश्न यह भी उठता है की क्या ऐसी स्तिथि में पेटीएम को पेमेंट बैंक में कैसे बदला जा सकता है.

ऐसा भी नहीं है की पेटीएम पर पहली बार किसी कंपनी ने केस किया हो. इसके पहले मोबिविक ने पेटीएम पर कैशबैक ऑफर के लिए विदेशी पूजी का निवेश बताया था. हालाँकि फ्लिपकार्ट और अन्य कई कंपनिया भी डिस्काउंट ऑफर के लिए विदेशी पूँजी का सहारा लेती है.

इससे पहले इस तरह का केस ई बे ने जोमाटो पर किया था .
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रविवार, 18 दिसंबर 2016

आधार कार्ड और कैशलेस ट्रांजैक्शन

आधार कार्ड और कैशलेस ट्रांजैक्शन
नोटबंदी के बाद लोगो को पैसो को लेकर काफी समस्यायों का सामना करना पड़ रहा है. एटीएम और बैंको में कैश की कमी को देखते हुए कैशलेस ट्रांजैक्शन ही एक बेहतर विकल्प नजर आ रहा है . सरकार भी इस तरफ गंभीरता से सोच रही है. ज्यादा से ज्यादा लोगो को कैशलेस ट्रांजक्शन से जोड़ने के लिए  नए नए तरीके ले कर आ रही है.  इसी के तहत अब कैशलेस ट्रांजैक्शन के लिए आधार कार्ड के प्रयोग पर काम कर रही है. ये कैशलेश के तरफ बढ़ने वाला सबसे क्रांतिकारी कदम होने जा रहा है.

इनफोकस लांच करेगा आधार इनेबल्ड फ़ोन

सरकार जल्द से जल्द आधार इनेबल्ड पेमेंट के लिए ऐप बनाने की कोशिश कर रही है. मोबाइल कंपनिया नए मोबाइल सेट में फिंगरप्रिंट या आईरिस की पहचान करने वाला सिस्टम बनाने पर विचार कर रहे है. इसी कड़ी में अभी कुछ दिन पहले ही इनफोकस ने भारत में जल्द ही ऐसा स्मार्टफोन लांच करने का एलान किया है जो उपभोक्ता के लिए आधार कार्ड का काम करेगी. इस फ़ोन को इनफोकस एम425 नाम दिया गया है. अमेरिका की मोबाइल बनाने वाली कंपनी इनफोकस का कहना है की इस फ़ोन में आईरिस स्कैनर लगा होगा. इस फ़ोन की कीमत करीब12000 रुपये बताई जा रही है. इनफोकस के अनुसार,  इसे एस टी क्यू सी (स्टैंडर्डाइजेशन टेस्टिंग ऐंड क्वॉलिटी सर्टिफिकेशन) मिला है. बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन में आइरिश रिकॉग्निशन डिवाइसेस के इस्तेमाल के लिए  एस टी क्यू सी सर्टिफिकेशन दिया जाता है. इनफोकस एम425में सुपीरियर इमेज क्वालिटी असेसमेंट एल्गोरिदम होगाजिससे सही आईडेन्टिफिकेशन की जा सकेगी. इनफोकसयू आई डी ए आई के अलावा केन्या अमेरिका और कोलम्बिया  में सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है. अब तक सिर्फ सैमसंग ही ऐसी कंपनी है जो गैलेक्सी टैब में आईरिस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है.

आईये देखते है की क्या होगा ये सिस्टम और यह कैसे काम करेगा.

आधार कार्ड में आपकी पूरी डिटेल दर्ज होती है. देश भर में लोगो को आधार कार्ड जारी करने वाले यू आई डी ए आई के पास लोगो के फिंगरप्रिंट और आँखों की पहचान यानि आईरिस डाटा मौजूद होगा. लेन देन करने वालो का आधार नंबर बैंक से लिंक होना जरूरी होगा. इसके बाद आपको आधार इनेबल्ड डिवाइस पर या स्मार्टफोन पर अंगूठा या अपने आँखों की पहचान देनी होगी. पहचान मैच होते ही पेमेंट हो जायेगा. फिंगरप्रिंट या आईरिस के जरिये ही पेमेंट होगा. डिजिटल लेन देन में आधार नंबर का सिस्टम शुरू करने के लिए सरकारी कोशिशे जोरो पर है. आँध्रप्रदेश में आधार नंबर पर राशन बाटने की योजना सफल रही है. 
क्या होंगे फायदे
आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम यानि  (ए इ पी एस) के चलन में आते ही बहुत सारी समस्याएं एक झटके में ख़तम हो जाएँगी. बैंको पर भी काम का दबाव कम होगा. आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के और भी फायदे है जैसे आप अपने खाते का बैलेंस पता कर सकते है.  पैसा निकाल सकते है. पैसा जमा कर सकते है. दूकान पर पेमेंट कर सकते है. इसका सबसे बड़ा फायदा तो यह है की लोग पिन और पासवर्ड जैसी प्रक्रिया से बच जायेंगे. पैसा उपभोक्ता के अकाउंट से दूकानदार के अकाउंट में सीधे चला जायेगा. आधार नंबर का डिजिटल सिस्टम लागु होने पर लोगो को डेबिट या क्रेडिट कार्ड ले कर चलने से छुटकारा मिलेगा. साथ ही कार्ड के पिन याद करने के झंझट से भी मुक्ति मिलेगी. कार्ड के खो जाने का भी डर ख़त्म हो जायेगा. आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम के सफल हो जाने पर सरकार कैशलेश ट्रांजैक्शन में आम आदमी को जोड़ सकेगी.

क्या हो सकते है नुकसान

एसोचैम ( दी एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ़ इंडिया ) और एक रिसर्च फर्म ई वाई के रिपोर्ट के अनुसार भारत में मोबाइल फ्रॉड 60 से 65 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है. साथ ही साथ नेटबैंकिंगडेबिट और क्रेडिट कार्ड के फ्रॉड भी बढ़ेंगे. ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती करोड़ो लोगो के बायोमेट्रिक डाटा को सुरक्षित और इस्तेमाल लायक बनाना होगा. इसके अलावा आपको पैसे के लेन देन के लिए आपका मौजूद रहना जरूरी होगा.

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रविवार, 11 दिसंबर 2016

भारत संचार निगम लिमिटेड यानी बीएसएनएल और एयरसेल लेकर आये अनलिमिटेड कालिंग

रिलायंस कि जियो ऑफर 5 सितम्बर को लांच किया था | जियो कि यह ऑफर तीन महीने के लिए था जिसकी अवधी अब बढ़ा कर 31 मार्च 2016 तक कर दिया गया है | जियो के इस ऑफर के बाद अन्य कंपनियों ने भी अपने प्लान सस्ते करने शुरू कर दिए | अब बीएसएनएल  जियो से टक्कर लेने के लिए एक शानदार प्लान लाया है | इस प्लान से 149 रुपये में अनलिमिटेड लोकल और एसटीडी कॉल कर पाएंगे | यह प्लान एक महीने के लिए होगा | इस प्लान को एक जनवरी से शुरू होने की संभावना है |

जैसा की बताया जा रहा है इस प्लान में अनलिमिटेड कॉल के अलावा 300 MB डाटा और 100 एसटीडी और लोकल SMS भी शामिल है इस प्लान से बीएसएनएल , रिलायंस जियो को टक्कर दे सकता है |

ठीक इसी तरह का प्लान एयरसेल ने भी लांच किया है | हिंदुस्तान के अनुसार एयरसेल 148 रुपये में तीन महीने अनलिमिटेड कालिंग कि प्लान लाया है | एयरसेल ने इस प्लान कि नाम ऍफ़ आर सी 148 रखा है |

इस प्लान में आपको एयरसेल टु एयरसेल अनलिमिटेड कालिंग कि लाभ मिलेगा | अन्य नेटवर्क पर भी आप 250 मिनट लोकल व एसटीडी बात कर सकते है | 250 मिनट समाप्त होने के बाद 30पैसा/ मिनट कि चार्ज लगेगा | इस प्लान के लिए आपको 148 के अलावा तीन महीने में कम से कम 50 रुपये कि रिचार्ज करना होगा |
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5G upcoming technology

आपलोग 2G , 3G , 4के बारे में जरूर सुना होगा और आप में बहुत सारे लोग इनमे से किसी ना किसी टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल कर रहे होंगे और ज्यादातर लोग जो 4G का भी इस्तेमाल कर रहे होंगे कहीं ना कहीं अपने इन्टरनेट की स्पीड को और बेहतर चाहते होंगे | सबसे पहले 2G आया 1991 में उसके बाद 3G आया 1998 में फिर 4G आया 2008 में और अब  आने वाले दिनों में 2020 तक  आप 5G का इस्तेमाल कर पाएंगे जिसकी स्पीड 4G से कही अच्छी होगी |

5बिलकुल अलग तरह से काम करेगा जैसे की अभी वर्तमान में हम 700MHz , 1900 MHz फ्रीक्वेंसी का प्रयोग करते है मतलब फ्रीक्वेंसी बैंड की सीमा 1GHz से 2GHz की है जबकि 5G 28 GHz से शुरू होगा जोकी 60 GHz तक जा सकता है |

फ्रीक्वेंसी बढ़ने से हम काफी तेजी से डाटा एक जगह से दूसरी जगह भेज पाएंगे और इन्टरनेट की स्पीड काफी बढ़ जाएगी पर इसका नुकसान ये होगा की सिग्नल लॉस ज्यादा होगा क्योंकि फ्रीक्वेंसी बढ़ने से रेंज कम हो जाती है | इस समस्या से निजात पाने के लिए मिलीमीटर वेव टेक्नोलॉजी का प्रयोग करते है जिससे हमें अपने स्मार्टफोन में मल्टीप्ल एंटेना लगाने की सहूलियत मिल जाएगी जिससे सिग्नल स्ट्रेंथ बढ़ाया जा सकेगा और यही काम हम मोबाइल टावर के साथ भी कर सकते है |

अभी 5G के लिए कोई मानक तय नहीं किया गया है जैसा की 4G के लिए LTE डिफाइंड किया गया है या 3के लिए HSPA या उमटस है तो अभी हमें इसके लिए इंतज़ार करना पड़ेगा |


अगर 5G के स्पीड की बात करे तो QUALCOMM के अनुसार इसकी स्पीड 5GPs हो सकती है और QUALCOMM इसे 2018 के ओलंपिक में टेस्ट भी करने वाला है
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शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

मैं एक हिन्दू हूँ और परेशान हूँ .......


मैं एक हिन्दू हूँ और परेशान हूँ धर्म निरपेक्ष रहना चाहता हूँ पर ......... और मेरी ये परेशानी लगातार बढती जा रही है मुझे समझ नहीं आ रहा की मैं क्या करू | हिन्दू हूँ तो जहां मैं ३३ करोड़ देवी देवताओं का आदर सम्मान कर सकता हूँ तो अवश्य ही कुछ और अलाह ईसामसीह और अन्य देवी देवताओं का आदर कर सकता हूँ और ये सब करते हुए भी मैं हिन्दू रह सकता हूँ लेकिन मुझे तब दुख होता है जब मेरे मुस्लिम भाई क्रिश्चियन भाई प्रसाद खाने से मना कर देते है तिलक लगाने से मना कर देते हैं | क्या धर्म निरपेक्ष होना सिर्फ हिन्दुओं का उत्तरदायित्व है | अगर भारत धर्म निरपेक्ष है तो क्यों हमारे आपके टैक्स के पैसो से हज सब्सिडी दी जाती है . क्या यह एक विशेष धर्म का पक्ष लेना नहीं है ... लेकिन फिर वही बात की मैं हिन्दू हूँ और मुझे लगता है की ठीक है कोई बात नहीं अगर इससे वो खुश है तो ठीक है क्योंकि ईद मुबारक कहना मुझे भी अच्छा लगता है | इस समय हम ऐसे देश में रह रहे है जहाँ अगर कोई मुसलमान या क्रिश्चियन कहे की भारत को मुस्लिम या क्रिश्चियन राष्ट्र बना दे तो कोई खबर नहीं बनती और ये सूडो इंटेलेक्टुअल के पेट में दर्द नहीं होता लेकिन जैसे ही किसी ने कहा की ये हिन्दू राष्ट्र है तो ये सूडो इंटेलेक्टुअल अपना झाल मंजीरा लेकर आ जाते है राग अलापने .. भाई मेरे अगर विरोध करना है तो दोनों का करो , क्योंकि दोनों गलत है सेलेक्टिव क्रिटसिज़्म बंद करो ... मैं हिंदू हूँ और कहा जाता है माइनॉरिटी को आप लोग दबाते है ६० साल में हम एक मंदिर नहीं बना सके जब की देश में ८० प्रतिशत हिन्दू हैं और आप कहते हैं हम आपकी नहीं सुनते अगर ऐसा होता तो मंदिर कब का बन गया होता .पर ऐसा नहीं है बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है , मैं बीफ नहीं खाता शाकाहारी हूँ पर अगर आप खाना चाहे तो खा सकते हैं ये आपका बेहद निजी मसला है लेकिन जब ये आप सिर्फ हमें चिढ़ाने के लिए करते हैं तब दुःख होता है और गुस्सा भी आता है . आप को जो खाना हो खाएं पर चिढ़ाएं नहीं ... 
अगर ये तथाकथित बुद्धजीवी अपना पुरस्कार वापस करना चाहते है तो करें मैं आपके साथ रहूँगा.... जब आप कहेंगे , हज सब्सिडी हटा ली जाये , सबके लिए एक ही कानून हो, धर्म विशेष के लिए अलग अलग व्यवस्थाएं न हों , आप अगर दादरी का विरोध कर रहे है पुजारी की भी हत्या का विरोध करिये .... आरक्षण आर्थिक आधार पर हो , किसी भी तरह के हिंसा को धर्म से या जाती से न जोड़ा जाये , हिन्दू आतंकवाद ,मुस्लिम आतंकवाद जैसे शब्दों का प्रयोग बंद हो , आतंकवादी को सिर्फ आतंकवादी कहा जाये ......
इतनी उम्मीद तो मैं आप लोगो से कर ही सकता हूँ .......
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ढोल, गंवार, शुद्र, पशु , नारी । सकल ताड़ना के अधिकारी


दरअसल.... कुछ लोग इस चौपाई का अपनी बुद्धि और अतिज्ञान के अनुसार ..... विपरीत अर्थ निकालकर तुलसी दास जी और रामचरित मानस पर आक्षेप लगाते हुए अक्सर दिख जाते है....!
यह बेहद ही सामान्य समझ की बात है कि..... अगर तुलसी दास जी स्त्रियो से द्वेष या घृणा करते तो.......
रामचरित मानस में उन्होने स्त्री को देवी समान क्यो बताया...?????
और तो और.... तुलसीदास जी ने तो ...
“एक नारिब्रतरत सब झारी। ते मन बच क्रम पतिहितकारी।“
अर्थात, पुरुष के विशेषाधिकारों को न मानकर......... दोनों को समान रूप से एक ही व्रत पालने का आदेश दिया है।
साथ ही .....सीता जी की परम आदर्शवादी महिला एवं उनकी नैतिकता का चित्रण....उर्मिला के विरह और त्याग का चित्रण....... यहाँ तक कि.... लंका से मंदोदरी और त्रिजटा का चित्रण भी सकारात्मक ही है ....!
ऐसे में तुलसीदास जी के शब्द का अर्थ......... स्त्री को पीटना अथवा प्रताड़ित करना है........आसानी से हजम नहीं होता.....!
साथ ही ... इस बात का भी ध्यान रखना आवश्यक है कि.... तुलसी दास जी...... शूद्रो के विषय मे तो कदापि ऐसा लिख ही नहीं सकते क्योंकि.... उनके प्रिय राम द्वारा शबरी.....विषाद....केवट आदि से मिलन के जो उदाहरण है...... वो तो और कुछ ही दर्शाते है ......!
फिर, यह प्रश्न बहुत स्वाभिविक सा है कि.... आखिर इसका भावार्थ है क्या....?????
इसे ठीक से समझाने के लिए...... मैं आप लोगों को एक """ शब्दों के हेर-फेर से..... वाक्य के भावार्थ बदल जाने का एक उदाहरण देना चाहूँगा .....
मान ले कि ......
एक वाक्य है...... """ बच्चों को कमरे में बंद रखा गया है ""
दूसरा वाक्य .... "" बच्चों को कमरे में बन्दर खा गया है ""
हालाँकि.... दोनों वाक्यों में ... अक्षर हुबहू वही हैं..... लेकिन.... दोनों वाक्यों के भावार्थ पूरी तरह बदल चुके हैं...!
असल में ये चौपाइयां उस समय कही गई है जब ... समुन्द्र द्वारा श्री राम की विनय स्वीकार न करने पर जब श्री राम क्रोधित हो गए........ और अपने तरकश से बाण निकाला ...!
तब समुद्र देव .... श्री राम के चरणो मे आए.... और, श्री राम से क्षमा मांगते हुये अनुनय करते हुए कहने लगे कि....
- हे प्रभु - आपने अच्छा किया जो मुझे शिक्षा दी..... और ये लोग विशेष ध्यान रखने यानि .....शिक्षा देने के योग्य होते है .... !
दरअसल..... ताड़ना एक अवधी शब्द है....... जिसका अर्थ .... पहचानना .. परखना या रेकी करना होता है.....!
तुलसीदास जी... के कहने का मंतव्य यह है कि..... अगर हम ढोल के व्यवहार (सुर) को नहीं पहचानते ....तो, उसे बजाते समय उसकी आवाज कर्कश होगी .....अतः उससे स्वभाव को जानना आवश्यक है ।
इसी तरह गंवार का अर्थ .....किसी का मजाक उड़ाना नहीं .....बल्कि, उनसे है जो अज्ञानी हैं... और प्रकृति या व्यवहार को जाने बिना उसके साथ जीवन सही से नहीं बिताया जा सकता .....।
इसी तरह पशु और नारी के परिप्रेक्ष में भी वही अर्थ है कि..... जब तक हम नारी के स्वभाव को नहीं पहचानते ..... उसके साथ जीवन का निर्वाह अच्छी तरह और सुखपूर्वक नहीं हो सकता...।
इसका सीधा सा भावार्थ यह है कि..... ढोल, गंवार, शूद्र, पशु .... और नारी.... के व्यवहार को ठीक से समझना चाहिए .... और उनके किसी भी बात का बुरा नहीं मानना चाहिए....!
और तुलसीदास जी के इस चौपाई को लोग अपने जीवन में भी उतारते हैं....... परन्तु.... रामचरित मानस को नहीं समझ पाते हैं....
जैसे कि... यह सर्व विदित कि .....जब गाय, भैंस, बकरी आदि पशुओं का दूध दूहा जाता है.. तो, दूध दूहते समय यदि उसे किसी प्रकार का कष्ट हो रहा है ....अथवा वह शारीरिक रूप से दूध देने की स्थिति में नहीं है ...तो वह लात भी मार देते है.... जिसका कभी लोग बुरा नहीं मानते हैं....!
सुन्दर कांड की पूरी चौपाई कुछ इस तरह की है.....
प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं।
मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥
ढोल, गंवार, शुद्र, पशु , नारी ।
सकल ताड़ना के अधिकारी॥
भावार्थ:-प्रभु ने अच्छा किया जो मुझे शिक्षा दी.. और, सही रास्ता दिखाया ..... किंतु मर्यादा (जीवों का स्वभाव) भी आपकी ही बनाई हुई है...!
क्योंकि.... ढोल, गँवार, शूद्र, पशु और स्त्री........ ये सब शिक्षा तथा सही ज्ञान के अधिकारी हैं ॥3॥
अर्थात.... ढोल (एक साज), गंवार(मूर्ख), शूद्र (कर्मचारी), पशु (चाहे जंगली हो या पालतू) और नारी (स्त्री/पत्नी), इन सब को साधना अथवा सिखाना पड़ता है.. और निर्देशित करना पड़ता है.... तथा विशेष ध्यान रखना पड़ता है ॥
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सोमवार, 31 अक्तूबर 2016

भाई दूज पूजा शुभ मुहूर्त

जैसा की भाई - बहन के परस्पर प्रेम का प्रतीक यह त्यौहार दीपावली के एक या दो दिन बाद मनाया जाता है ,इस साल भाई दूज का त्यौहार 1 नवम्बर को मनाया जायेगा | कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को भाई बहनों को समर्पित पर्व  को यमद्वितीया भी कहते हैं | इसदिन बहनें अपने भाई को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र व उज्ज्वल भविष्य के लिए कामना करती हैं | ऐसा मन जाता है की यम-द्वितीया के दिन यमराज स्वयं धरती पर अपनी बहन यमुना से मिलाने आते हैं | चित्रगुप्त की भी पूजा इसी दिन होती है | इस दिन बहन के हाँथ से बने चावल खाने से भाई की उम्र लंबी होती है ऐसी मान्यता है | 
Happy Bhai Dooj

जैसा की इस बार भैया दूज 1 नवम्बर को मनाया जा रहा है पर ३ बजे से लेकर साढ़े चार बजे तक राहु काल है तो इस समय को छोड़कर कभी भी बहाने अपने भाई को तिलक कर सकती है  |

 यमराज अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे, लेकिन ज्यादा काम होने के कारण अपनी बहन से मिलने नहीं जा पाते। एक दिन यम अपनी बहन की नाराजगी को दूर करने के लिए उनसे मिलने पहुंचे। भाई को आया देख यमुना बहुत खुश हुईं। भाई के लिए खाना बनाया और आदर सत्कार किया। बहन का प्यार देखकर यम इतने खुश हुए कि उन्होंने यमुना को खूब सारे भेंट दिए। यम जब बहन से मिलने के बाद विदा लेने लगे तो बहन यमुना से कोई भी अपनी इच्छा का वरदान मांगने के लिए कहा। यमुना ने उनके इस आग्रह को सुन कहा कि अगर आप मुझे वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन हर साल आप मेरे यहां आएं और मेरा आतिथ्य स्वीकार करेंगे। कहा जाता है इसी के बाद हर साल भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है।
इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा को लेकर भी भाई दूज की एक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि नराकासुर को मारने के बाद जब भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने पहुंचे थे। उनकी बहन ने उनका फूलों और आरती से स्वागत किया था और उनके माथे पर टीका किया था। जिसके बाद से इस त्योहार को मनाया जाने लगा और इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती हैं।
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शनिवार, 29 अक्तूबर 2016

नरकचतुर्दशी : मुहूर्त , पूजा और महत्व



इस बार नरक चतुर्दशी 29 ऑक्टूबर 2016 को मनाई जा रही है | कहा जाता है इस दिन भूमि देवी ने अपने बेटे नरकासुर का वध किया था और इसीलिए आज के दिन व्रत रखते हैं और शाम को कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा करते है | ये भी माना जाता है की माँ काली ने नरकासुर का वध किया था | नरकचतुर्दशी को बहुत ही उत्साह से मनाया  जाता है | नरक चतुर्दशी का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है और ये माना जाता है की आज के दिन पूजा पाठ करने से नरक जाने से बच सकता है |

लोग आज के दिन देवी देवताओं को खुश करने की कोशिश करते है ताकि उनकी असीम अनुकम्पा बनी रहे | लोग तेल और उपटन लगाते है और काजल लगाते है ताकि बुरी नजर से बचा जा सके |

नरकचतुर्दशी मानाने का मुहूर्त

अभ्यंग स्नान मुहूर्त  = 05:20 to 06:41

समय = 1 घंटा 20 मिनट
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ -- 18 :20 --- 28/Oct/2016
चतुर्दशी तिथि समाप्त -- 20:40 --- 29/Oct/2016
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गुरुवार, 27 अक्तूबर 2016

धनतेरस – लक्ष्मी – दीपावली





धनतेरस लक्ष्मी दीपावली
पांच दिनों का दीपो का उत्सव प्रकाश पर्व शुक्रवार धनतेरस से शुरू होगा । भगवान् धन्वन्तरि बिघ्नों को दूर कर आरोग्य प्रदान करते  है । वैसे तो धनतेरस पर सोना- चांदी या बर्तन खरीदने की परंपरा सदियों से रही है लेकिन इस बार अमृत योग और स्थिर लग्न में खरीदारी का कई गुना फल मिलेगा  पर अगर आप आज के दिन बर्तन खरीदते हैं तो उसमे मिष्ठान से भर दे , शास्त्रो में मान्यता है की ऐसा करने से माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है ।  वैसे तो  सभी 12 राशियों के जातकों के लिए कुछ भी खरीदना शुभ होगा पर राशि के अनुसार लग्न विशेष में लक्ष्मी पूजा करने से जातक के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी रहता है।

सभी राशियों के लिए लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त  6:50से 7:03 बजे तक।

दीपोत्सव  की तिथियां
28 अक्तूबर : धनतेरस
29 अक्तूबर : नरक चतुर्दशी, हनुमत जयंती
30 अक्तूबर : दीपावली
31 अक्तूबर : गोवर्धन पूजा, अन्नकूट
1  नवम्बर :  भइया दूज

 दीपावली की शुभकामनाएं




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बुधवार, 21 सितंबर 2016

मिटटी भी जहा की पारस उस शहर का नाम बनारस है



बनारस कोई शहर नहीं है न ये पहले कभी था न अब है न आगे होगा .... बनारस तो यहां के लोगो से है , यहाँ की मस्ती से है , यहां की सोच से है | बनारस दुनिया का सबसे पुराना और जीवित शहर है ,कहते हैं कि चौसठ योगिनियों, बारह सूर्य, छप्पन विनायक, आठ भैरव, नौ दुर्गा, बयालीस शिवलिंग, नौ गौरी, महारूद्र, चौदह ज्योर्तिलिंग, काशी में ही हैं। अतः महाज्ञानी जब तक काशी में अपने ज्ञान की परीक्षा नहीं देता, तब तक उसका ज्ञान अधूरा रहता है।

चना चबैना, गंगाजल जो पुरवै कर तार
काशी कबहूं न छोडि़ये विश्वनाथ दरबार।

बनारस के बारे में कहा जाता है कि जो यहां कुछ दिन रह गया उसका मन फिर दुनिया में कहीं नहीं लगता. मशहूर शहनाई वादक स्वर्गीय बिसमिल्ला खान से लेकर आईआईटी बनारस में प्रोफेसर रह चुके जानेमाने प्रर्यावरणविद डा वीरभद्र मिश्र को विदेशों में बेहतर सुख-सुविधाओं के साथ बसने के तमाम मौके मिले, लेकिन उन्होंने यह कर कभी बनारस नहीं छोड़ा कि उन्हें वहां “गंगा” कहां मिलेगी.

 बनारस में आज भी लोग दफ्तर और दूकान जाने के अलावा भी घर से बाहर निकलते हैं , चाय-पान की दूकान पर बतियाते मिल जाएंगे | यहां लोग अपना जीवन आराम और उल्लास से मानते हैं | काशीनाथ सिंह ने लिखा है जो मजा बनारस में वो न पेरिस में न फारस में। ...|जिस तरह से बनारस का पान, भांग, मिठाई, साड़ी, आम जगत विख्यात है, उसी तरह यहां की गप्पबाजी भी सारे जहां में प्रसिद्ध है। बनारस के गप्प में जो मजा है, वह सारे जहां के सच में नहीं है।

बनारस अपनी गंगा जमुनी तहजीब के लिए भी जाना जाता है यहाँ एक मस्जिद है लाटभैरो की मस्जिद जहा मस्जिद के बीच में एक मंदिर है मस्जिद में नमाज़ और मंदिर में पूजा एकसाथ होती है | . गांगा का आनन्द यहां के हिंदू ही नहीं मुसलमान भी उठाते हैं. गंगा के घाटों पर विचरण करते तमाम मुसलमान मिल जाएंगे. मशहूर शायर नजीर बनारसी को गंगा के घाट बहुत प्रिय थे. वे कहा करते थे कि ईश्वर उन्हें कभी बनारस से दूर न करे. तो बिसमिल्ला खान भगवान शिव के अराधक थे और विश्वनाथ मंदिर भगवान शंकर के दर्शन करने जाया करते थे. यह दुर्लभ उदाहरण केवल बनारस में ही मिल सकता है.

बनारस के बारे में अपनी पंक्ति में नीलभ उत्कर्ष लिखते है

‘’रईसों मलंगों की बस्ती बनारस
कई घाट गंगा गुज़रती बनारस ,
नहीं आपाधापी नहीं भागादौड़ी
यहाँ अल सुबह रोज़ छनती कचौड़ी
अजब सी है मस्ती यहाँ की ठहर में
ग़ज़ल अपनी काशी मुकम्मल बहर में

हर हर महादेव ...............
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रविवार, 14 अगस्त 2016

हिन्दू धर्म के त्यौहार आने पर हिन्दुओ की मूर्खता

हिन्दू धर्म के त्यौहार आने पर हिन्दुओ की मूर्खता-

आजकल एक बड़ा खतरनाक प्रचलन चला है हिन्दुओं में, वह यह कि जैसे ही कोई त्यौहार आने वाला होता है, खुद हिन्दू ही उस त्यौहार को ऐसे पेश करते हैं जैसे वो उनके ऊपर बोझ है :

1) रक्षाबंधन पर मूर्खता :
कुछ हिन्दू ऐसे मैसेज भेजते हैं कि ||कोई भी अनजान चीज को हाथ नहीं लगाये, उसमें राखी हो सकती है !! ||

अरे कूल dude !!
तुम्हारे लिए अपनी बहन बोझ बन रही है?? तुम तो राखी का मज़ाक़ बना बैठे हो, तुम क्या अपनी माँ बहन की रक्षा करोगे? राखी एक रक्षा सूत्र है, अगर तुम भूल रहे हो तो याद दिलाऊँ राजस्थान में औरतें अपनी रक्षा के लिए जोहर कर आग में कूद जाती थी।

रानी पद्मिनी के साथ 36000 औरतें जोहर हो गयी थीं। एक महिला की रक्षा मज़ाक लगती है???

2) दशहरा पर मूर्खता :
यह मैसेज आजकल खूब प्रचलन में है कि || रावण सीता जी को उठा ले गया है और राम जी लंका पर चढ़ाई करने जा रहे हैं, उसके लिये बंदरो की आवश्यकता है, जो भी मैसेज पढ़े तुरंत निकल जाये ||

वाह!!! आज सीता अपहरण हिन्दुओं के लिए मज़ाक़ का विषय हो गया है। जोरू का गुलाम बनना गर्व का विषय और राम का सैनिक बनना मज़ाक़ हो रहा है!!!

दूसरा जोक || रावण को कोर्ट ले जाया गया व कहा गया कि गीता पर हाथ रख कसम खाओ तब रावण कहता है सीता पर हाथ रखा उसमें इतना बवाल हो गया, गीता पर रखा तो……||

यह बड़े शर्म की बात है कि अग्नि परीक्षा देने के बाद भी आज हिन्दू सीता माता के चरित्र पर सवाल उठाने को मज़ाक़ समझते हैं। कभी अपनी माता के बारें में ऐसे मज़ाक़ उड़ाया? अगर नहीं तो तुम्हें किसने हक दिया समस्त हिंदुत्व की माता पर हाथ रखने को मज़ाक़ बनाने का ????

एक हमारा मीडिया पहले ही हिन्दू त्यौहारों के पीछे पड़ा है-
होली पर पानी बर्बाद होता है लेकिन ईद पर जानवरों की क़ुरबानी धर्म है!

दिवाली पर पटाके छोड़ना प्रदूषण है पर ईसाई नव वर्ष पर आतिशबाजी जश्न है!

नवरात्री पर 10 बजे के बाद गरबा ध्वनि प्रदूषण हो जाती है, वहीं मोहरम की रात ढोल ताशे कूटना और नववर्ष की रात जानवरों की तरह 12 बजे तक बाजे बजाना धर्म है!!!

करवा चौथ और नाग पंचमी पाखंड है वहीं ईसा का मरकर पुनः लौटना गुड फ्राइडे वैज्ञानिक है!!

हिन्दुओं को यह लगता है कि अपने पर्व का मज़ाक़ बनाना सही है तो इससे बड़ी लानत क्या होगी??

हम राखी और सीता अपहरण पर मज़ाक़ करते हैं, इसके पीछे समाज की मानसिकता बनती है। लोग लड़की की रक्षा से कतराते हैं , क्योंकि राखी को हमने मज़ाक़ बना दिया है, हमने सीता माता जैसी पवित्र माँ का मज़ाक़ बना दिया है। इससे पता चलता है हम कितने धार्मिक हैं!

हिन्दू धर्म की विडंबना देखिए :-
जन्माष्टमी आयी तो श्री कृष्ण को टपोरी तडीपार और ना जाने क्या-क्या कहा!

गणेश जी आये तो उनका भी मज़ाक़ बनाया!

नवरात्रि आयी तो ये चुटकुला आया “नौ दिन दुर्गा-दुर्गा फिर मुर्गा-मुर्गा…”

विजयादशमी पर श्री राम-माता सीता और रावण पर चुटकुले चले!

कभी सोचा है ओरिजनली कौन ये सब पोस्ट कर रहा है??? ये कभी किसी ने भी जानने की कोशिश नहीं की.. बस अपने मोबाइल पर आया तो बिना सोचे समझे फॉरवर्ड करने की वही भेड़ चाल चालू..!!

इस तरह के मैसेज बनाने वाले जानते हैं कि हम हिन्दू अपने धर्म को लेके सजग नहीं हैं और एडवांस्ड दिखने के चक्कर में कुछ भी फॉरवर्ड कर देंगे.. तभी ये ऐसे मैसेज बनाकर सर्कुलेट करते हैं!!

किसी और धर्म के लोगों को उनके धर्म के जोक्स पढ़ते या फॉरवर्ड करते देखा है?? उनको तो छोड़ो, आप भी उनके धर्म के जोक्स फॉरवर्ड करने से पहले 10 बार सोचते हो कि किसको भेजूँ- किसको नहीं??

तो हिन्दू धर्म का मज़ाक़ उड़ाते शर्म नहीं आती..??

मेरा करबद्ध निवेदन है कि
अपने हाथों से अपने धर्म का अपमान ना करें.. कुछ सीखे अन्य धर्म के लोगो से उनकी तरह ही अपने धर्म का सम्मान करे
जय श्रीकृष्ण !!!
जय श्रीराम
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