रविवार, 1 अगस्त 2010

मित्रता एक शब्द नही भावना है एहसास है

मित्र दिवस पर समर्पित एक कविता


मित्रता एक शब्द नही भावना है एहसास है
जैसे पवन में सुगंध की मिठास है
मित्रता एक अतुलनीय सम्मान हैं विश्वास है
दुख के अंधेंरे में सुख का प्रकाश है
मित्रता कड़ी धूप में बरगद कि छाँव है
तपती हुई रेत पर रास्ते बताते हुए पाँव है
मित्रता आप से आपकी पहचान है
अपने गुनो अवागुणो का ज्ञान है
मित्रता अहं राग द्वेष ईर्ष्या का हवन है
प्रेम सौहार्द कर्म ज्ञान से निर्मित भवन है

7 टिप्‍पणियां:

  1. मित्रता अहं राग द्वेष ईर्ष्या का हवन है
    प्रेम सौहार्द कर्म ज्ञान से निर्मित भवन है

    बहुत खूब

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  2. wah kya kub kahi bhaiya aapne
    aap to pure kavi ban gaye ho.......
    wah! wah !.........

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  3. whah whah kya baat hai!!!!!!

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  4. मित्रता एक शब्द नही भावना है एहसास है
    जैसे पवन में सुगंध की मिठास है...बहुत खुब

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