मंगलवार, 7 जुलाई 2009

लौट अगर तुम वापस आते

लौट अगर तुम वापस आते !
उर की सारी व्यथा पुरानी,
करुनामय सन्देश की वाणी ,
संचित विरह अंत हो जाते ,


लौट अगर तुम वापस आते !

ग!ता प्राणों का तार तार ,
आँखें देती सर्वस्वा वार,
रोम रोम पुलकित हो जाते,

लौट अगर तुम वापस आते !

छा जाता जीवन में बसंत ,
सब ब्यथा कथा जीवन पर्यंत ,
बन पराग पथ में बिछ जाते ,

लौट अगर तुम वापस आते
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