गुरुवार, 2 जून 2016

भारतीयता और पाश्चात्य के अंतर को समझ पाना असंभव हो गया है

संस्कारों और ज्ञान के ह्रास ने इस नयी पीढ़ी को उस दोराहे पर ला कर खड़ा कर दिया है जहा से उनके लिए सत्य और असत्य , मान और अपमान , ज्ञान और अज्ञान , भारतीयता और पाश्चात्य के अंतर को समझ पाना असंभव हो गया है |
लड़कियों और लड़कों की जगह जगह से फटी हुयी कुल्हो से नीचे जांघो तक खिसकती हुयी जींस को आज फैशन समझा जाने लगा है , स्टेटस की बात माना जाने लगा है |किसी भी परफ्यूम , डीयो , पेस्ट , बनियान , अंडरवियर की बड़ी कम्पनी का नाम बता कर , अश्लील विज्ञापन दिखा उसके जरिये लड़की पट जाने की बात बता कर कर संस्कारों को मटियामेट किया जा रहा है | फूहड़ फिल्मे और बेहूदा गाने , संस्कृति का अपमान करते गाने देख कर गुनगुना कर हमने फिल्मकारों को आज माँ भारती पर अपमान जनक गाना गाने की इजाजत भी दे डाली है |


शायद इस नयी पीढ़ी को इन सब बातो से कोई फर्क ना पड़ता हो किन्तु जिनकी रगों में आज भी सनातनी रक्त बह रहा है उनसे मेरा अनुरोध है की अब इस अश्लीलता का , इस पाश्चात्य संस्कृति का , इस गलत शिक्षा प्रणाली का विरोध करे अन्यथा हमारी धरोहर , हमारी संस्कृति , हमारी माँ भारती पर केवल विधर्मियों का कब्ज़ा होगा |
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3 टिप्‍पणियां:

  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 03/06/2016 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    उत्तर देंहटाएं

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